09 August 2016

Centum Epsum Of Failure@shashi bhushan kumar



Centum Epsum Of Failure@shashi bhushan kumar

1) Earth is not revolves around the the sun.

2)speed of light is very high due to superimpose of their wave.

3) earth is not an open system its like a close spherical ball.

4)Sun is not a spherical body.

5)treatment of cancer can be possible by induce electric field method.


i will post here hundred of my research. with a strong evidence. so it will become the strong thesis.

thesisclimax.com


यह पश्चिम का एजेंडा है भारत बांटने का सबसे आसान तरीका है

यह पश्चिम का एजेंडा है
भारत बांटने का सबसे
आसान तरीका है

इतिहास गवाह है पन्नों पर
मुस्लिम लीग के दंगो पे
खुद को कुछ देशभक्त कहते 
कार्यरत है इस कर्मों पे

विकास तभी संभव है जब
पूरी बहुमत हो सरकारों को
शुरू किया यह धंधा था
पहले देश आजादी से 
चला रहा हैं अब तक वह
बहुत बड़े होशियारी से

वंचित रहा है जनता अब तक
यह अनचाही सच्चाइयां से
भोले भाले बात में आकर
पिट रहा महामारी से

पहले पिटता था यह 
बड़े बड़े जमींदारों से 
आज पिट रहा है 
बड़े-बड़े विद्वानों से

थोड़ी सी शोहरत मिली
मांग करे तब कुर्सी की 
भोले-भाले जनता समझे
यह बात करे यह प्रगति की

दे दे के बहुमत अबकी बार
बना दे सरकार की
हाल रहा जब यही देश में
तो हर परिवार की पार्टी हो
बिना बांटे ही देश बांट जाए

जब ऐसी गद्दारी हो 
कौन चलाएं देश अगर 
हर घर-घर ही सरकारी हो 
यह पश्चिम का एजेंडा है 
भारत बांटने का सबसे 
आसान तरीका है

पैसे ले लेकर शोहरत से
वंचित रहा हूं मैं 
विश्व गुरु बनने का क्या
विश्व फकीर बना हूं
विकास संभव हो कैसे

जब कोलेशन की सरकारें हो
संभव कैसे विकास जब
13 दिन में ही सरकार गिरा 
कौन लौटाये काला धन
कैसे बचाएं फिर सरकार

जब पार्टी कूदने की सुविधा
देश में चले बेशुमार 
कैसे कहें ईमानदार किसी को
कैसे कहे गद्दार

घर के बीचो-बीच हो 
एक हजार दीवार 
कैसे कोई क्रांति चले 
जो मिले लोगों को अधिकार
जब देशप्रेम की चोला दिखे

और निकले चोर गवाड़ 
अन्ना को अनुदान मिले
पार्टी को सरकार 
देश के कोने-कोने से

आए जख्मी बीमार
वैद्य ही धंधा छोड़ा और
बनाए नई सरकार 
ये पश्चिम का एजेंडा है
भारत बांटने का सबसे 
आसान तरीका है

देश बांटने जैसे है 
जो बांटे देश की भाव को
ना समझे यह भोले भाले
की गांधी की कमी पड़ी है 
नेहरु जिन्ना की होर में

हमको हमको करते-करते
इक देश बना फक़ीर 
यह पश्चिम का एजेंडा है 
भारत बांटने का सबसे 
आसान तरीका है

जय हिंद 
@शशि भूषण कुमार

08 August 2016

it can be targeted by hacker so easily.

hacker के लिए चित्र परिणाम



some of the website is at high risk like following and need  to change their 
privacy control because it can be targeted
by hacker so easily. 
but i cant share how it possible due to secutity cause 
www.lhhb.com
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युवा होना एक वय है, पर किसी खास उम्र में होना भर नहीं है। यह जीवन का वह मोड़ है, जब बचपन पीछे छूट गया होता है और जिंदगी मुकम्मल-सी नजर आती है।




युवा होना एक वय है, पर किसी खास उम्र में होना 
भर नहीं है। यह जीवन का वह मोड़ है, जब बचपन पीछे छूट गया होता है और जिंदगी मुकम्मल-सी नजर आती है। भारत युवाओं का देश है और हमेशा ही यह युवाओं का देश ही रहेगा, कम से कम सन 2030 तक तो यह कयास लगाए ही जा रहे हैं। यह कोई भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि जनसंख्या विज्ञानियों का शुद्ध व स्पष्ट गणितीय अनुमान है। जनसंख्याओं के अध्ययन के दौरान एक अवधारणा हमारे सामने आती है, जिसे हम वय मध्य कहते हैं। वय मध्य या मीडियन एज से आशय उस वय से होता है, जिसके नीचे की आधी आबादी युवा और ऊपर की आधी आबादी वृद्ध समझी जाती है। सरल शब्दों में इसे एक खास आबादी के सभी लोगों की औसत आयु कहा जा सकता है। 
संयुक्त राष्ट्र (यू.एन.) के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के अंतर्गत आने वाला जनसंख्या संभाग समय-समय पर विश्व भर की भविष्य युवाओं का है। जनसांख्यिकीय गणनाएं बताती हैं कि २क्३क् तक भारत विश्व की आबादी का एक चौथाई होगा। साथ ही देश में युवाओं की संख्या, बाकी दुनिया के मुकाबले काफी अधिक होगी। जाहिर है कि युवा भारत — सशक्त भारत समाज, कला, संस्कृति, विज्ञान और उद्योगों में दखल के जरिए दुनिया में सकारात्मक बदलावों का नेतृत्व करेगा। 
जनसंख्या पर अध्ययन करता रहता है। इन अध्ययनों से साफ पता चलता है कि हमारे देश में लोगों का वय मध्य सन 2010 तक की गणनाओं के मुताबिक 25.5 वर्ष था, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की खुफिया एजेंसी सी.आई.ए. के अनुसार 2013 तक 26.7 वर्ष हो गया है। इस आंकड़े को अलग करके देखने पर इसमें पुरुषों का वय मध्य 26.1 वर्ष और स्त्रियों का वय मध्य 27.4 वर्ष पता चलता है।
अब हम भारत में निवास करने वाले 1 अरब 21 करोड़ से अधिक लोगों व विश्व की 17.06 फीसदी आबादी की तुलना, दूसरे देशों से करते हैं। आज की तारीख में चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। दूसरे स्थान पर भारत आता है और संयुक्त राज्य अमेरिका, जनसंख्या के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश है। 31 दिसम्बर, 2012 तक संपन्न हुई जनगणना में पता चला कि चीन की 
आबादी 1 अरब 35 करोड़ 40 लाख से अधिक है, जो विश्व की कुल आबादी का 19.08 फीसदी हिस्सा है। चीन का वय मध्य 36.3 वर्ष है। 
वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका, जिसकी आबादी 5 जुलाई, 2013 तक 31 करोड़ 61 लाख से ज्यादा लोगों के साथ विश्व जनसंख्या का 4.46 फीसदी हिस्सा थी, की स्थिति भी कमोबेश चीन की तरह ही है। वहां कुल वय मध्य 37.2 वर्ष है। 
मानव-जाति की आबादी लगभग 7 अरब 9 करोड़ 61 लाख से अधिक लोगों की है और संपूर्ण मनुष्यता का वय मध्य आज की तारीख में 29.4 वर्ष है। आंकड़ों से साफ दिखता है कि दुनिया का वय मध्य भारत से अधिक है, यानी दुनिया भर की तुलना में भारत में अधिक युवा हैं। साथ ही यह बात पुरजोर तरीके से समझ में आती है कि हिंदुस्तान विश्व की ऐसी आबादी वाला देश है, जिसका मानव-जाति में प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ता जा रहा है और जो लोग यह नुमाइंदगी कर रहे हैं, वह युवा हैं। 
इसका नतीजा यह है कि दुनिया भर में उत्पादन के दुनिया भर में गजब के बदलाव लाएंगे। पश्चिमी दुनिया के पास संसाधन तो होंगे, पर दक्ष लोगों के लिए उन्हें अब तक ‘कमतर’ और ‘कमजोर’ समझे जाने वाले देशों पर आश्रित होना होगा। भारत की महत्ता इस लिहाज से भी विश्व-राजनीति में बदल जाएगी। सन 2030 तक भारत एक घनी आबादी वाला देश होगा। इसके कई घाटे हो सकते हैं, लेकिन प्रकाश की एक लौ भी दूर से दिखती है। प्रौढ़ हो चुके अन्य देशों के बीच हम नई ऊर्जा और हिम्मत के साथ तब 
भी एक नई दुनिया बना रहे होंगे। ऐसी दुनिया, जिसमें सदियों से संजोया अनुभव तो होगा, पर दकियानूसी खयालों का एक कतरा भी शेष नहीं बचेगा। 
जब युवा विज्ञान, राजनीति, कला, साहित्य, उद्योग, व्यापार और जीवन के तमाम क्षेत्रों में ताकतवर होंगे तो यह मानवता के लिए नए भोर की तरह होगा। संवेदनाएं जहां नई होंगी, सपने नए होंगे और चूंकि समतामूलक प्रेम ही यौवन का धर्म है तो ऐसे रिश्ते समाज के 
ताने-बाने को हर तरफ मजबूत करेंगे। नए जमाने का आगाज होगा, ताकत का पुरकशिश एहसास होगा और उमंगों की धड़कती कहानी होगी। इन संभावनाओं के बाद यह कहने में अब क्या परहेज हो कि भविष्य हमारा — हिंदुस्तान के लाखों-करोड़ों युवाओं का है। 



www.thesisclimax.com


























coming soon with a new thesis on Cancer it is in Progress, which will our own view point, on cancer it will the part of my novel "Centum Epsum Of Failure".
--Shashi Bhushan Kumar...

06 August 2016

Why was Hippocrates called the "father of medicine"?





A conventionalized image in a Roman "portrait" bust (19th-century engraving)
Native nameἹπποκράτης
Bornc. 460 BC
KosAncient Greece
Diedc.370 BC
Larissa, Ancient Greece
EthnicityGreek
OccupationPhysician
EraClassical Greece
TitleThe Father of Western Medicine


As Greekmedicine.net explains, Hippocrates is known as the father of modern medicine because he was the first doctor who held reason, logic and science to be central in the practice. Before Hippocrates’ teachings spread throughout the world, the practice of medicine was rife magic, superstitions and supernatural elements. While modern medicine has changed greatly since the time of Hippocrates, his dedication to science changed medicine forever.According to Wikipedia, Hippocrates was born in 460 B.C., in the town of Kos, Greece. Hippocrates soon began to view the treatment of the human body differently than his predecessors and contemporaries. His views on medicine, including his assertion that medicine should be considered distinct from philosophy and other disciplines, were revolutionary at the time. This even led to Hippocrates serving a 20 year prison sentence. However, during his incarceration, he wrote many medical manuscripts, including “The Complicated Body.”
Because of his significant contribution, many medical terms and principles are named after Hippocrates. The Hippocratic Oath is an important promise taken by those who intend to practice medicine. Those who take the oath promise to do no harm to their patients, among other principles. Wikipedia indicates that the oath has been replaced by similar oaths in recent times. Additionally, clubbed fingers, first described by Hippocrates, are sometimes called “Hippocratic fingers.
famous quotes Hippocrates?
Some famous quotes from Hippocrates are "For extreme diseases, extreme methods of cure, as to restriction, are most suitable" and "When the disease is at its height, it will then be necessary to use the most slender diet," as translated from Greek to English by Francis Adams. All of the most famous sayings by Hippocrates can be found in the "Aphorisms of Hippocrates" collection.
 

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